दीप जगदीप सिंह । ज़ी लिट्ररेचर फैस्टीवल देश दुनिया में साहित्य के जशन का पर्यावाची बन गया है। हर साल जनवरी में ग़ुलाबी 'रेगिस्तान' शब्दों के समंदर में डूब जाता है, जिसमें दुनियां भर के नामी कलमकार अपने विचारों की लहरें लेकर आते हैं और दुनिया भर से आए साहित्य प्रेमियों को अपनी नमकीन बूंदों से सराबोर कर जाते हैं। 2016 में ज़ी जयपुर लिट्ररेचर फैस्टीसवल अपना एक दशक पूरा करने जा रहा है, ग़ुलाबी 'रेगिस्तान' शब्दों के समंदर का स्वारगत करने के लिए तैयार हो चुका है।
21 से 25 जनवरी तक चलने वाले साहित्य के इस महांकुंभ में सदाबहार कथाकार रस्किान बांड, इस साल के मैन बुकर सम्मान प्राप्त लेखक मैरन जेम्ज़, भारत के चर्चित मनोवैज्ञानिक व लेखक सुधीर कक्ककड़, विश्व विख्यात अदाकार व कॉमेडियन स्टीिफन फ्राई, हिंदी कथाकार, कवि व उपन्यासकार उदय प्रकाश, अल्काि साराओगी, कॉल्म् टायबिन, आयरलैंड के महान लेखक माग्रेट ऑटवुड, फ्रांसिसी अर्थशास्त्री थॉम्स् पिकेटी, टेल्ज़ ऑफ सिटी के विख्यालत लेखक आर्मिटड माओपिन और पंजाबी क्रांतिकारी बंत सिंह मेले का मुख्य आर्कषण होंगे।
21 से 25 जनवरी तक चलने वाले साहित्य के इस महांकुंभ में सदाबहार कथाकार रस्किान बांड, इस साल के मैन बुकर सम्मान प्राप्त लेखक मैरन जेम्ज़, भारत के चर्चित मनोवैज्ञानिक व लेखक सुधीर कक्ककड़, विश्व विख्यात अदाकार व कॉमेडियन स्टीिफन फ्राई, हिंदी कथाकार, कवि व उपन्यासकार उदय प्रकाश, अल्काि साराओगी, कॉल्म् टायबिन, आयरलैंड के महान लेखक माग्रेट ऑटवुड, फ्रांसिसी अर्थशास्त्री थॉम्स् पिकेटी, टेल्ज़ ऑफ सिटी के विख्यालत लेखक आर्मिटड माओपिन और पंजाबी क्रांतिकारी बंत सिंह मेले का मुख्य आर्कषण होंगे।
![]() |
| Jaipur Literature Festival 2016 |
इस बारे मेले की हर जानकारी को पाठकों तक पहुंचाने के लिए विशेष ऐप भी लांच किया गया है, जिसे यहां से (Apple) व (Android) प्राप्त किया जा सकता है। इस बार मेले के प्रबंधकों ने आगुनतुकों की सुविधा के लिए ऑनलाईन रजिस्ट्रररेशन के साथ-साथ 17 जनवरी से मेला-स्थल पर भी पंजीकरण करने का प्रबंध किया है ताकि लोग आसानी से मेले तक पहुंच सकें। यह पंजीकरण मेला स्थल पर 20 जनवरी रात 9 बजे तक जारी रहेगा।
एक ओर जहां मेले में खेलों से जुड़े विशेष सैशन में सुरेश मैनन, अनिल कुंबले, रॉनोजाय सेन, बायचुंग भूटिया और सिदिन वेंडुकुट खेल जगत के कुछ अहम पहलुओं पर चर्चा करेंगे। वहीं एक अन्य सैशन में विख्यात फिल्मकार करण जौहर अपने जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं से पर्दा हटाएंगे। मेले के प्रबंधक कुछ और बड़े सरप्राईज़ देने का दावा कर रहे हैं, जिसका पर्दा मेले के दौरान ही उठेगा। उसके लिए मेले में पहुंचना होगा।
एक ओर जहां मेले में खेलों से जुड़े विशेष सैशन में सुरेश मैनन, अनिल कुंबले, रॉनोजाय सेन, बायचुंग भूटिया और सिदिन वेंडुकुट खेल जगत के कुछ अहम पहलुओं पर चर्चा करेंगे। वहीं एक अन्य सैशन में विख्यात फिल्मकार करण जौहर अपने जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं से पर्दा हटाएंगे। मेले के प्रबंधक कुछ और बड़े सरप्राईज़ देने का दावा कर रहे हैं, जिसका पर्दा मेले के दौरान ही उठेगा। उसके लिए मेले में पहुंचना होगा।
प्रवास और बंटवारा मेले में विचार के केंद्र में रहेगा और इसके तहत राजनैतिक, सांस्कृतिक और भूगौलिक स्तर पर इसके प्रभावों पर चर्चा की जाएगी। इसके साथ ही आधुनिकता के समाज, परंपराओं, रिवाज़ों और ज्ञान पर पढ़ रहे प्रभाव की भी चर्चा होगी। इसमें निजता का विषय अहम रहेगा।
मेले के भव्य आयोजन को ज़ी एंटरटेनमेंट, महिदरा हयूमैनिटीज़ सेंटर, द इंडियन क्वारटरली, आगा खां फाउंडेश्न , वाईपीओ, पेंगुइन और एम्बिट के साथ साथ जॉन मिचाल्स्की फाउंडेशन, द ग्लेंनलिवेट, किगफिशर और फुल सर्कल का बड़ा सहयोग प्राप्त है। मेले को सफल बनाने में ऐयरटेल, रिकेट बेंकाईज़र का डेटोल बनेगा स्वटच्छ इंडिया कैंपेन, नरायणा हैल्थ, गैटी फाउंडेशन और स्टे़ट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर का भी अहम योगदान रहेगा।
ज़ी लिट्ररेचर फैस्टीडवल की सह-निदेशका नमिता गोखले का कहना है कि साल का वह दिन फिर आ गया है जब हम पुस्तरक प्रेमियों के स्वागत के लिए तैयार हैं। हर साल यह आयोजन सफलता की नई सीढ़ियां चढ़ता जा रहा है। किताबों, विचारों और संवाद का एक और भव्य आयोजन आपका इंतज़ार कर रहा है।
समारोह के सह-निदेशक विलियम डर्लिम्पल कहते हैं कि हर साल जनवरी में उत्साह का समंदर हिलोरे मारने लगता है। इस साल हमारे पास सबसे बेहतरीन कार्यक्रम की तैयारी हो चुकी है।
टीमवर्क आर्टृस के निदेशक व ज़ी लिट्ररेचर फैस्टीवल के प्रोडयूसर संजय के. रॉय कहते हैं कि जनवरी में हर रास्ता जयपुर की ओर मुड़ जाता है क्यों कि लोग मिल कर साहित्यक और विचारों का जशन मनाते हैं और सर्दियों की मज़ेदार धूप का आनंद लेने दुनिया के सबसे ख़ूबसूरत शहर आते हैं।
ताे क्या आप तैया हैं विचारों के इस सागर में डुबकी लगाने के लिए?
No comments:
Post a Comment